उलझन

Ulshan

सीने में दबे हुए अरमान
जो मौका खोज रहे है
पर ज़िन्दगी के कुछ
रास्तों में हर दिन मोड़ नए है

समझ नहीं आता
किस राह को चुनु
हालत मुझे ऐसे
दोराहे पर छोड़ गए है

कुछ दूसरी आँखों में भी
मुझसे उमीदें सजी हैं
पर मेरे सपने
उनकी आँखों के लिए अजनबी हैं
सोचकर यही कि
दूसरी आँखों में भी
रंग भरना है
उमीदों को पूरा करना है
मैं थोड़ी देर रूक गया हूँ
पर ऐसा नहीं हालातों के आगे
झुक गया हूँ

ख्वाबों में रंग भरने कि कोशिश चलती रहेगी
हौले हैले ही सही ख्वाहिशे
मचलती रहेंगी
हर गुज़रती घडी एक कोशिश सा बीत रही ह
उलझन जो शायद ज़िन्दगी सुलझा रही है

Vishal Sharma

Image Source [http://www.sentimentalcalligraphy.in/wp-content/uploads/2012/05/dilemma.jpg]