चाँद: मेरी निगाहों से

Chand

कितनी ना-इंसाफी होती है
ना चाँद के साथ,
बेचारा कितनी सदियों से
‘नाइट-शिफ्ट’ कर रहा है
‘वीकेन्ड’ पे भी
उसको फुरसत नहीं मिलती
महीने में केवल एक छुट्टी;
उसी मे कपड़े भी धोता है
उसी मे उसका ‘रिक्रियेशन’ भी होता है
हमे लगता है ये चन्द्रग्रहण
धरती के सूरज और चाँद
के बीच मे आने से होता है,
ऐसा कुछ भी नहीं है
उस दिन वो असल मे
फर्जी वाली ‘सिक-लीव’ पर होता है.


करे भी तो क्या करे वो बेचारा
उसकी ‘मैनेजर’ रात ‘वर्कोहलिक’ है
खुद तो जागती ही है रात भर
उसे भी नहीं सोने देती है
और ये सारे तारे जो दिखते हैं
ये सब ‘डिफेक्ट्स’ थे
जो चाँद ने ‘फिक्स’ किये हैं.

‘सैलरी-डे’ वाले दिन
चाँद कुछ ज्यादा ही चमकता है
फिर घटती ‘सैलरी’ के साथ-साथ
खुद भी घटता जाता है
समझ नहीं आता क्यूं लोगों को
चाँद में माशूका नज़र आती है
मुझे तो उसमे अक्स दिखता है
कुछ हैरान, कुछ परेशान से
‘आई-टी प्रोफेशनल’ का.

Kushagra Singh

Image Source [http://www.flickr.com/photos/[email protected]/4312923500/in/photolist-7z7RU1-fieJHr-9g1JXd-cx79RL-e77RgN-cXjxpj-bGtA7T-fdpZ3w-9rMcYL-9ykyZq-bj22U6-8TbRRD-82ZeiD-di4Lga-bkaGsE-d3oANC-eWTzZB-bkGLah-8F2hQU-7KZ1eh-agb2di-9y5H8V-dNHczh-bPJ4Wc-aA58LL-btoWFC-btdYUy-93vN5V-bUbGgi-dm3VgW-gcAt6y-dzSVUg-dawHjd-bzX6Hv-7zye1R-9rSkHd-7UivPx-cyr75S-biz5PX-9UiRLM-7Pynvo-8dEgoL-9u2eeR-bVN67V]