Meraj Ahmad Writes a Letter to the Prime Minister

सम्मानीय प्रधानमंत्रीजी,

सादर अभिवादन   

सर्वप्रथम मैं सहर्ष गर्व के साथ कहता हूँ की मुझे हिन्दुस्तानी होने पर गर्व है और ऐसा विचार वास्तविक रूप से जिस दिन हमारे नेताओं के दिलों में बैठ जायेगा, उस दिन वास्तविक रूप से देश में सुख शान्ति का माहौल बनेगा.

उपरोक्त वाक्यों के माध्यम से मैं यह इशारा करना चाहता हूँ की देश कोई भी हो और शासन करने वाला किसी भी मज़हब या धर्म से सम्बन्ध रखता हो, यदि देश में शान्ति कायम करनी है तो सर्वप्रथम उस शासक को पक्षपाती धार्मिक विचारों से दूर होकर देश के विकास के बारे में विचार करना होगा. क्या हमारे देश के नेताओं और प्रशासनिक अंगों में ऐसी भावनाएं नज़र आती हैं? कदापि नहीं. जब भी चुनावों का दौर हो, रैलियों की रेलमपेल हो अधिकतम यही सुनने को मिलता है की कोई मुस्लिम नेता कह रहा है – ‘हमें मुस्लिम होने पर गर्व है’ तो कहीं एक हिन्दू नेता दावा कर रहा है की – “हमें हिन्दू होने पर गर्व है” – काश यह कुर्सी के दीवाने यह कहा करते की – “हमें हिन्दुस्तानी होने पर गर्व है” तो यक़ीनन हमारे देश की अखंडता में एकता का माहौल ज़रूर बनता. अतः नेताओं और प्रशासनिक वर्ग के लोगों पर प्रतिबन्ध हो की जब भी वे लोग देशहित या जनहित पर कोई भाषण लोगों के बीच अथवा मीडिया के बीच प्रस्तुत कर रहे हों तो अपने धार्मिक विचारों का प्रयोग नहीं करें और ना ही किसी घटी हुई विवादित धार्मिक घटना को वहां जीवंत करने का प्रयास करें, क्योंकि एक नेता अथवा प्रशासनिक अंग अपने धर्म की नहीं बल्कि अपने देश की आन, बान, शान होता है. उसकी छवि से देश की महानता जुडी होती है.

प्रश्न है की दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को ख़त्म कैसे करें? यथार्थ की बात करें तो इन अत्याचारों को नियंत्रित करने हेतु पुलिस विभाग का निर्माण हुआ और विडंबना यह है की आकड़ों के हिसाब से इस अश्लीलता में पुलिस विभाग के कुछ भेड़िये भी शामिल हैं. रक्षक जब खुद ही भक्षक बना हो तो असली भक्षकों का आतंक तो सर चढ़ कर बोलेगा ही.

यहाँ पर मैं बड़े ही अहम मुद्दे पर प्रकाश डालने जा रहा हूँ. कोशिश करूँगा की स्पष्ट रूप से प्रस्तुत कर सकूं. देश की कुल आबादी में सीधे साधे लोगों और भ्रष्ट लोगों की बात करें तो सबसे ज्यादा संख्या सीधे साधे आम लोगों की है. जब भी इन आम लोगों में कोई किसी समस्या से जूझता है तो ज़रुरत होने के बाद भी यह पुलिस से दूर रहना चाहता है, आखिर क्यों?

मैं पीएम् साहब से इसका जवाब सुनना चाहूँगा, क्योंकि यह विडंबना एक ज़माने से बनी हुई है. क्यों लोग डरते हैं अपने ही समाज के, देश के लिए बने एक रक्षक से. वास्तविकता तो यह है की जब आम आदमी अपनी समस्या के निदान हेतु पुलिस विभाग की सहायता लेने का प्रयास करता है तो उसे एक नयी समस्या का सामना करना होता है और वो है पुलिस विभाग द्वारा उस आम आदमी पर कानून के उलटे और दबंग दाव पेंच का प्रयोग. कहने का तात्पर्य यह है की एक आम आदमी, गलती न करते हुए भी अपनी समस्या को प्रस्तुत करने से डरता है. फिर यह कानून के रखवाले गुनाह करते हुए भी कैसे महफूज़ हैं? क्या इन्हें भी कभी डर होता होगा की हमारी हरकतों पर भी किसी की पकड़ होगी? यदि ऊपर से इनपर भी कड़ी पकड़ होती तो दबंग और अश्लील करने से पहले यह आम आदमी की तरह ज़रूर डरते. जहाँ रक्षक ही बिकता हो वहां पर सुरक्षा की उम्मीद कितनी होगी?

अब वक़्त है बदलाव का. पी. एम. साहब यदि देश में महिलाओं पर अत्याचार को रोकना है या देश में शांति लाने का दिल से इरादा हो तो पुलिस विभाग पर लगाम कड़ी करनी होगी और मीडिया से भी आग्रह है की इन भ्रष्टकर्मियों को ज्यादा से ज्यादा मैसेज दें की इनके घरों में भी माँ बेटियां हैं.

मैं एक इन्वेन्टर भी हूँ. मुझे अपनी कुछ अविष्कार हेतु भूतपूर्व राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हो चुका है. यातायात में हो रही दुर्घटनाओं की वृद्धि की रोकथाम हेतु ज़रुरत है कुछ नए परिवर्तन की. अर्थात इसकी रोकथाम के लिए कुछ नए यंत्रों का उपयोग ज़रूरी हो गया. मैं अपने देश के हित में यातायात के लिए कुछ नए विचार और नया यंत्र देना चाहूँगा ताकि जिन जिन कारणों से दुर्घटनाओं बढ़ रही हैं, वह कम हो.

डेंगू की बढ़ रही समस्या में सुधार लाने के लिए सरकार की तरफ से लोगों को जागरूक करने वाले कार्यक्रम प्रस्तुत कराये जाएँ और खुले नाले और जमा पानी की जगहों पर रसायनों के छिड़काव करने के साथ उन रसायनों को प्रत्येक घर तक मुफ्त पहुचाया जाये, जैसे की पल्स पोलियो का अभियान सफलता पूर्वक पूरे जोर शोर से संपन्न किया जाता है. यह कार्यक्रम किसी सोसाइटी के माध्यम से करने के बजाय पल्स पोलियो अभियान की तरह संपन्न किया जाये. इस प्रकार कुछ बेरोजगारों को भी राहत मिलेगी.

इंधनों की कीमत में हो रही वृद्धि की रोकथाम के लिए, सरकार सर्वप्रथम राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित करे. जिसमे नए और उत्तम विकल्प चुन कर उन्हें पुरुस्कृत करने की बात हो ताकि नए विचार और अविष्कारक खुल कर सामने आयें. यक़ीनन उत्तम विकल्प सामने आएंगे, क्योंकि कहा गया है और यथार्थ ही है की “परिवर्तन ही संसार का नियम है”.

कम इंधन खपत करने वाली दुपहिया और चार पहिया वाहनों पर सरकार अधिक सब्सिडरी दे और उनकी खरीद पर लगने वाले कर तथा रोड टैक्स भी कम करे और उच्चतम मशीनरी वाली महँगी गाड़ियों पर विपरीत क्रिया करते हुए टैक्स बढ़ा दिया जाये, क्योंकि ऐसी गाड़ियाँ कम समय में अधिकतम इंधन खपत करती हैं और दूरी समान तय करती हैं. जैसे जैगुआर, मर्सिडीज़, बी. एम्. डब्ल्यू, एस यु वी आदि. इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाये तथा जगह जगह पर उनका चार्जिंग स्टेशन बनवाया जाये. एल पी जी की तरह प्रत्येक मोटर वाहन को सीमित पेट्रोल देने का प्रावधान किया जाये.

जय हिन्द जय भारत 

निवेदक 
मेराज अहमद 
(छात्र, अविष्कारक, लेखक)
‘प्रथम राष्टीय पुरुस्कार विजेता’
(By Former President of India)

Image Courtesy: [The Viewspaper]

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