Rashmi Tarika Writes a Letter to the Prime Minister

आदरणीय प्रधानमंत्रीजी
मैं एक भारतीय नागरिक होने के साथ साथ एक नारी भी हूँ, जो आपका ध्यान नारी की दयनीय स्तिथि
की ओर दिलाना चाहती हूँ.
प्रधानमंत्रीजी, हजारो सवाल मन में उठते हैं की क्यूँ नारी के सम्पूर्ण अस्तित्व को, उसके वजूद को, पुरुष समाज द्वारा ज़लालत भरी मानसिकता का शिकार होना पड़ेगा ? दिल्ली हो या हरयाणा, नारी हर जगह ही असुरक्षित है. आये दिन बलात्कार, छेर छाढ़ जैसी घटनाएं औरत को न केवल शरीर से बल्कि मन से भी तोड़ देती हैं. उसका वजूद तार तार हो जाता है. बलात्कार जैसी प्रताड़ना झेलती नारी का समाज और परिवार बहिष्कार कर देता है; लेकिन बलात्कारी पुरुष खुले आम घूमता रहता है. कानून का भी कुछ सख्त कदम न उठाना नारी की रही सही शक्ति को भी मानो छीन लेता है. क्यूँ और आखिर कब तक नारी का इस तरह से शारीरिक एवं मानसिक शोषण होता रहेगा?
अगर नारी ही सुरक्षित नहीं तो हम अपनी ‘भारत माता’ की रक्षा कैसे करेंगे? आज हर नारी जो बलात्कार जैसी घिनोनी हरकत का शिकार है वो सहानुभूति की नहीं, उचित न्याय, ठोस कानून की मांग करते हुए आपसे सम्पूर्ण नारी जाति की ओर से अपने सवाल का जवाब चाहती है.
आखिर बताइए की उसकी सुरक्षा के क्या कानून के लिए क्या माप दंड तय किये गए हैं की वो इत्मीनान से सर उठाकर बेफिक्र होकर किसी भी गली नुक्कड़, बस ट्रेन या कहीं भी सुरक्षित आ जा सके?
प्रधानमंत्रीजी अब ख़ामोशी की नहीं उचित कदम उठाने की ज़रूरत है, एक आशा एक उम्मीद हर नारी की आवाज़…हज़ारो सवाल पर जवाब एक जो आपको देना है.
वन्देमातरम
एक हिन्दुस्तानी नारी
रश्मि तारिका

Image Courtesy: [The Viewspaper]

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